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स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन, केरल
इस प्रकल्प की स्थापना 1972 में हुई। वायनाड जिले का अविकिसत, पहाड़ी, वनवासी क्षेत्र कार्य के लिए चुना गया। अठारह (18) जनजातियाँ एवं एक आदिम जनजाति (Kattunaika) कट्टुनैका, इस क्षेत्र के निवासी हैं। जमीन खरीदना, बेचना, जमीन के सरकारी दस्तावेज, अधिकारपत्र प्राप्त करना, जैसे व्यवहार, इन भोले-भाले लोगों ने कभी सोचे भी नहीं थे। फलतः इनकी भूमि अन्य लोगों ने हड़प ली। ऐसे गरीब, उपेक्षित लोगों को राहत पहुँचाना यह स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन का प्रधान उद्देश्य है। मुत्तिल गाँव में निशुल्क चिकित्सा केंद्र खोलकर ‘मिशन’ का कार्य प्रारंभ हुआ। अब वहाँ एक तीस शय्यावालक (Beds) सुसज्जित, अस्पताल चलाया जाता है। तीन पूर्णकालिक निवासी वैद्यकीय अधिकारी, बार-बार भेंट देने वाले दस (10) विशेषज्ञ, 15 अवैद्यकीय, 10 सहायक एवं कई सेवाभारती कार्यकर्ता यहाँ कार्यरत हैं। अधिकांश कार्यकर्ता वनवासी क्षेत्र के हैं। उन्हें यथोचित प्रशिक्षण देकर विशिष्ट दायित्व निभाने योग्य सक्षम किया जाता है। 1973 में जब केवल 5321 रुग्णों पर उपचार किए गए थे अब, 2002 में 89,767 रुग्णों की सेवा की गई।
स्वा.वि.मे. मिशन के विविध उपक्रम
1) ‘‘सिकल सेल अनिमिया’’ नाम की जानलेवा बीमारी वनवासी बंधुओं में अधिक मात्रा में दिखाई देती है। ऐसा ज्ञात होने पर दिल्ली की (AIIMS) संस्था के सहयोग से मिशन ने एख प्रकल्प तैयार किया, जिसमें लगभग समस्त वनवासी बंधुओं का विधिवत् परीक्षण किय गया। इसमें जो रुग्ण पाए गए उनकी चिकित्सा, सलाह तथा अनुवर्ती देखभाल (Follow-up) की व्यवस्था की गई है। 2) संस्था को क्षयरोग (Tuberculosis) नियंत्रण कार्यक्रम में भारत सरकार के राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत निरीक्षम (Monitor) का दायित्व सौंपा गया है। प्रशस्ति पत्र प्रदान करके सम्मानित भी किया गया है। 3) कोझीकोड (Calicut) के वैद्यकीय महाविद्यालय के सहयोग से कर्करुग्णों के लिए दुःख शामक/निवारक स्वास्थ्य चिकित्सा केंद्र चलाया जाता है। इस केंद्र के माध्यम से कुछ रुग्णों के घर में जाकर भी उपचार करने की व्यवस्था की जाती है। 4) चल चिकित्सालय के माध्यम से रुग्णों के बस्ती में उपचार करने की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त चल चिकित्सालय, शिशु, प्राथमिक विद्यालय तथा वनवासी छात्रावासों के सभी छात्रों का समय-समय पर वैद्यकीय परीक्षण करता है। चार वनवासी बहुल स्थानों पर वैद्यकीय उपकेंद्र खोले गए हैं। यहाँ साप्ताह में एख बार रोगनिदान तथा रुग्णोपचार किए जाते हैं। केवल 2002 में ही, वायनाड जिले के विभिन्न स्थानों में 430 स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर लगाए गए। जो गंभीर अवस्था के रुग्णों को संस्था अपनी व्यवस्था से तुरंत मुत्तिल के अस्पताल पहुँचा कर उपचार करती है। 5) स्वास्थ्य मित्रः ‘‘सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा’’ (Health for All) कार्यक्रम के अंतर्गत यह उपक्रम चलाया जाता है। अब तक 150 वनवासी कार्यकर्ताओं को मिशन ने प्रशिक्षित किया है। स्वास्थ्य मित्र उनके अपने प्रस्ताविक कार्यक्षेत्र में नियमित प्रवास करते हैं। गाँव के रुग्णों को प्राथमिक उपचार पहुँचाना तथा दृक्श्राव्य माध्यमों, साहित्य, छायाचित्र इत्यादि के प्रयोग से स्वास्थ्य शिक्षा देना यह स्वास्थ्य मित्रों का दायित्व रहता है। 6) सामाजिक सेवाकार्य/शिक्षाकार्यः मिशन के द्वारा 6 ग्रामीण विद्यालय, 15 बालसंस्कार केंद्र, 11 ग्राम सेवा समितियाँ संचालित की जाती हैं। दो गाँवों में पेय जल का प्रबंध तथा अन्य दो गाँवों में स्वच्छता गृहों का निर्माण भी किया गया है। 7) सिलाई प्रशिक्षण केंद्र चलाकर अब तक 60 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया है। 8) सिकल सेल अनिमिया व्याधि से ग्रस्त रुग्ण अत्यंत दुर्बल हो जाते हैं। उनके आर्थिक पुनर्वनस की दृष्टि से दो प्रशिक्षण केंद्र चलाए जाते हैं जहाँ बाँस एवं बेंत की वस्तुएँ तैयार की जाती है। कुल 90 रुग्ण इशका लाभ उठाते हैं। 1996 में स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन को ‘‘श्री गुरुजी पुरस्कार’’ देकर सम्मानित किया गया था।
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