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विट्ठल निकोड़े, सायखेडा गाँव का निवासी, केवल 24 साल का था, जब उसने आत्महत्या की। स्कूल में मेधावी छात्र रहे विट्ठल ने 12वीं में 72 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे और डी. एड. में प्रवेश भी पाया था। प्रतिकूल परिस्थिति के कारण आगे पढ़ नही पाया, खेती व्यवसाय करना प्रारंभ किया, तो लगातार होने वाले घाटे के कारण उसके ऊपर बहुत सा कर्ज हो गया। घर में विक्लांग माता-पिता, और परिवार के पालन का दबाव, विवश होकर उसने अपना जीवन समाप्त करने का निर्णय किया।
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के आत्महत्या करने वाले किसान परिवारों में से यह एक प्रतिनिधिक कहानी है। कुछ समय पहले, महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के किसानों की आत्महत्याओं के प्रश्न ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया था। बहुत से राजनेताओं का प्रवास उस क्षेत्र में हुआ, संसद तक प्रश्न उठाये गए, ‘मिडिया’ ने बहुत कुछ खबरे दी। इस का परिणाम प्रत्यक्ष आपदाग्रस्त परिवारों पर शून्य ही था।
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